चैत्र नवरात्रि 2025 का पर्व इस बार 31 मार्च से शुरू हुआ है और यह 9 दिनों तक मनाया जाएगा। इस दौरान हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा का दिन है, जो शक्ति की देवी मानी जाती हैं। इस दिन भक्त विशेष रूप से मां कूष्मांडा के साथ अपनी आराधना करते हैं, ताकि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सके।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
मां कूष्मांडा की पूजा के लिए विशेष रूप से इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। इसके बाद, देवी को लाल रंग के फूल, फल, मिठाइयां, और विशेष रूप से अंवला चढ़ाकर उनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन विशेष रूप से मंत्रों का जाप और दीपक जलाने का महत्व है।
चौथे दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से लेकर 7:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान विशेष रूप से देवी के 108 नामों का जाप और उन्हें शुद्ध जल से अभिषेक करना लाभकारी होता है। भक्तों को इस दिन व्रत रखना चाहिए और विशेष रूप से पवित्रता का ध्यान रखते हुए पूजा करनी चाहिए।
मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
मां कूष्मांडा देवी का रूप अत्यंत पावन और कल्याणकारी माना जाता है। उनकी पूजा से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि देवी कूष्मांडा ने ही इस ब्रह्मांड की रचना की थी। उनका नाम कूष्मांडा इसलिए पड़ा क्योंकि उनका शरीर उबला हुआ कूष्म (अंवला) के समान है और वे ब्रह्मांड के प्रत्येक अणु में रचनात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा से जीवन में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, उनकी पूजा से धन, सुख, और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।