धनतेरस के साथ दिपों का त्योहार दिवाली की शुरुआत हो चुकी है। देशभर में इसकी तैयारियां पूरे जोश और उत्साह के साथ चल रही हैं।वसनातन धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। यह त्यौहार हर साल कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। जोकी आज यानी गुरुवार को है, इस वजह से पूरे देश मे आज दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। आज के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। सनातन ग्रंथों में निहित है कि प्राचीन काल में समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या की तिथि पर माता लक्ष्मी अवतरित हुई थीं।
हर साल दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदी जाती है। दिवाली के दिन नई मूर्ति की पूजा-अर्चना कर यह मूर्ति वर्ष भर स्थापित रहती है और पुरानी मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल दिवाली पर नई मूर्ति में लक्ष्मी गणेश की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे क्या कारण या मान्यता है?
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति क्यों खरीदी जाती है
दिवाली के दौरान लक्ष्मी-गणेश की वही मूर्ति नई खरीदी जाती है जो मिट्टी से बनी हो। सोना, चांदी या पीतल जैसी धातुओं से बनी मूर्तियां नहीं बदली जातीं। आमतौर पर गणेशोत्सव या दुर्गा उत्सव के दौरान जब देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित की जाती है तो दस दिनों के बाद उसका विसर्जन कर दिया जाता है। लेकिन दिवाली पर स्थापित की गई लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति साल भर वहीं रहती है।
दरअसल, प्राचीन काल में मिट्टी से बनी मूर्तियों की पूजा का प्रचलन अधिक था। जो एक वर्ष तक रखे रहने पर टूट, क्षतिग्रस्त या बदरंग हो जाता था। इसलिए, दिवाली के शुभ अवसर पर, मूर्ति का विसर्जन किया गया और एक नई मूर्ति लाई गई। इसके बाद हर साल दिवाली पर नई मूर्ति खरीदने की परंपरा शुरू हो गई।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कब खरीदना शुभ
आपको बता दें कि दिवाली में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति खरीदने के लिए धनतेरस का दिन सबसे शुभ दिन माना जाता है। धनतेरस पर अन्य वस्तुओं की खरीदारी के साथ-साथ आप इस दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति भी खरीद सकते हैं। इस साल धनतेरस 29 अक्टूबर 2024 दिन मंगलवार को है और दिवाली का त्योहार 31 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।