तमिलनाडु में चुनावी घमासान तेज हो चुका है और रामनाथपुरम में एक मस्जिद की मीनार पर लगे 'अल्लाहु अकबर' बोर्ड को तिरपाल से ढकने पर नया बवाल खड़ा हो गया है। जैसे ही उस पर तिरपाल चढ़ाया गया, इलाके में सियासत गरमा गई। कुछ लोग इसे PM मोदी की प्रस्तावित यात्रा से जोड़ने लगे, तो वहीं मस्जिद कमेटी ने बिना किसी झिझक के आरोपों का करारा जवाब दिया।
मस्जिद के सचिव ए. सैयद मोहम्मद ने स्पष्ट किया कि तिरपाल इसलिए लगाया गया था ताकि निर्माण कार्य के दौरान बोर्ड को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने दो टूक कहा, "हमने यह काम अपने फैसले से किया है, किसी ने हमें मजबूर नहीं किया।" मस्जिद कमेटी ने विरोधियों की चालों पर पानी फेरते हुए यह भी बताया कि रमज़ान के मौके पर बोर्ड लगाया गया था और यह मस्जिद की पहचान का हिस्सा है।
पुलिस का तर्क: नेविगेशन में दिक्कत!
मंडपम पुलिस ने बोर्ड पर आपत्ति जताई थी। पुलिस का कहना है कि समुद्र के रास्ते से देखने पर यह बोर्ड लाइटहाउस जैसा दिखाई देता है, जिससे नौवहन (नेविगेशन) में मुश्किलें हो सकती हैं। साथ ही, पुलिस ने जमात को निर्देश दिया कि इतनी ऊँचाई पर बोर्ड लगाने से पहले प्रशासन और जिला कलेक्टर से अनुमति लेना जरूरी है।
दो घंटे में हटा तिरपाल, मगर बवाल बरकरार
SDPI के आरोपों के बावजूद मस्जिद कमेटी ने विवाद के बाद महज़ दो घंटे के भीतर तिरपाल हटा दिया। SDPI महासचिव मोहम्मद नववी ने इस घटनाक्रम पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसा उत्तर भारत में होली के मौके पर मस्जिदों को तिरपाल से ढकने के मामले सामने आते हैं। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया।