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आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना को किया संबोधित; बदलते भू-राजनीतिक हालात, सीमा सुरक्षा और रक्षा कूटनीति पर लिए गए अहम फैसले

भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन में सैन्य सुधारों, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा के नए दृष्टिकोण पर हुई गहन चर्चा।

Ravi Rohan
  • Apr 3 2025 3:30PM

भारतीय सेना का शीर्ष स्तरीय द्विवार्षिक 'आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' 1 से 4 अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश की सुरक्षा स्थिति, सीमाओं की परिस्थितियों, आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक और संगठनात्मक सुधारों के अलावा, आधुनिकीकरण व नई तकनीकों को अपनाने जैसे विषयों पर गहन चर्चा की। सम्मेलन के तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सेना के शीर्ष नेतृत्व को संबोधन रहा। उनके संबोधन से पहले "सुधारों के वर्ष" पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति भी दी गई।

भारतीय सेना पर देश का विश्वास अटूट: रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय सेना को देश का सबसे विश्वसनीय और प्रेरणादायक संगठन बताया। उन्होंने कहा कि सेना सिर्फ सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा सहायता और आंतरिक स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने सेना के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने रक्षा और सुरक्षा के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। साथ ही, आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में सेना के प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।

बदलते वैश्विक हालात और भविष्य की चुनौतियां

रक्षा मंत्री ने वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों और जटिल वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि दुनिया अब आपस में जुड़ी हुई है, और किसी भी देश में होने वाली घटनाओं का प्रभाव सभी पर पड़ता है। उन्होंने कहा, "भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक नहीं होंगे, बल्कि साइबर, सूचना, व्यापार और वित्त जैसे पहलू भी इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में भारतीय सेना को अपनी रणनीति को और अधिक व्यापक बनाना होगा।" उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारतीय सेना को दीर्घकालिक और अल्पकालिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी योजनाएं बनानी होंगी।

सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों पर रक्षा मंत्री का विश्वास

रक्षा मंत्री ने उत्तरी सीमा की स्थिति को लेकर सेना की सतर्कता की सराहना की और विश्वास जताया कि सैनिकों की कड़ी निगरानी जारी रहेगी। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा दुर्गम इलाकों में सड़क निर्माण के प्रयासों की भी तारीफ की। वहीं, पश्चिमी सीमा पर आतंकवाद को लेकर उन्होंने सेना की कार्रवाई की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि शत्रु की ओर से छद्म युद्ध (Proxy War) अभी भी जारी है। उन्होंने कहा, "भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों (CAPF) के बीच बेहतरीन समन्वय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है और यह जारी रहनी चाहिए।"

सैन्य कूटनीति और आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना की अंतरराष्ट्रीय सैन्य कूटनीति को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रक्षा अताशे (Defence Attaches) की भूमिका को पुनर्परिभाषित किया जाना चाहिए ताकि वे भारत के सामरिक उद्देश्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें। उन्होंने स्वदेशीकरण (Indigenisation) और आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना को देश की निजी औद्योगिक इकाइयों और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर आधुनिक तकनीकों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि और सरकार की प्रतिबद्धता

रक्षा मंत्री ने सभी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया कि वीर जवानों और उनके परिवारों की देखभाल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक सुधारों पर जोर

उन्होंने कहा कि सेना को हमेशा रक्षा कूटनीति, स्वदेशी तकनीक, सूचना युद्ध, रक्षा अवसंरचना और आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई सिफारिशों को गंभीरता से लेकर मध्यावधि समीक्षा (Mid-Course Review) के साथ लागू किया जाना चाहिए।

भारतीय सेना देश की शान, सरकार हर कदम पर साथ

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा, "भारतीय सेना राष्ट्र की शान है और सरकार इसके आधुनिकीकरण और सुधारों के हर कदम में पूरी तरह से समर्थन करेगी।" उन्होंने सेना के नेतृत्व को बधाई दी और कहा कि यह सम्मेलन देश की रक्षा नीति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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