आज ही का दिन था वो जब देश की सुरक्षा का जिम्मा अपने कन्धो पर उठा कर हमारे वीरों ने कश्मीर में एक नापाक हरकत में अपने प्राण गंवा दिए थे. उन्होंने आतंक के उस रूप को प्रेम और सद्भावना से समझाने और उनको सही राह पर लाने की बहुत कोशिश की थी लेकिन उन्होंने अपनी नापाक हरकते कम करने के बजाय और ज्यदा बढा दी थी.
ये हमला उसी दुस्साहस की अंतिम पराकाष्ठा थी. इस हमले के बाद देश ने एक स्वर में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए नासूर बन गये इस्लामिक आतंकवाद को जड से खत्म करने की मांग की थी. आज उस हमले की 5वीं बरसी पर देश में एक बार फिर से उस संकल्प को दोहराया जा रहा है.
इसी के साथ संकल्प ये भी है कि राष्ट्रवादी और धर्मरक्षक तब तक चैन से नही बैठने वाले हैं. जब तक इस प्रकार के आतंकवाद को खत्म नहीं कर लिया जाता. जिसने न सिर्फ हमारे अनगिनत सैनिको का बलिदान लिया बल्कि तमाम जनता के भी प्राण संकट में डाले.
हद की बात तो ये रही कि जब भारत के जांबाजों ने इस हमले का बदला लिया तब भारत की ही जनता से वोट लेने वाली विपक्ष की कई पार्टियों ने सेना के शौर्य पर सवाल उठा दिए थे. जबकि सरकार ने दावा किया कि भारत की तरफ से की गई जवाबी कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के सभी आतंकी ठिकानों को तहस-नहस कर दिया गया है.
PAK प्रायोजित इस्लामिक आतंकी आज भी सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाने की फिराक में हैं. इस हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान बलिदान हुए थे. यह जवान सीआरपीएफ की 76 बटालियन से थे. उन सभी वीर बलिदानियों को शत शत नमन और इस्लामिक आतंकवाद के समूल नाश में सक्रिय साझीदारी का संकल्प भी.