16 फरवरी : अत्याचारी टीपू ओर उसके अब्बाजान हैदर अली और निजाम को 4 बार युद्ध मे किया था परास्त... वीर योद्धा श्रीमंत माधवराव पेशवा जी के जन्मजंयती पर कोटि-कोटि नमन
आज की उस सर्वोच्च गाथा धर्मरक्षक वीर योद्धा श्रीमंत माधवराव पेशवा जी के जन्मजंयती पर सुदर्शन परिवार बारंबार नमन करता है उस महायोद्धा को और उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है.
इस वीर का सच्चा इतिहास अगर नकली कलमकार सामने रखते तो आज बाबर नाम के कलंक, लुटेरे, हत्यारे का मुकदमा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के खिलाफ न चल रहा होता और न ही खुद को कट्टर दिखाने के चक्कर मे कुछ भटके लोग श्रीराम के विरोधी बनते, लेकिन तथाकथित इतिहासकारों ने ढोल पीटे उस बाबर के जिसने हिन्दुओ का सामूहिक नरसंहार करवा कर उनके सिरों की मीनार बनवाई जो उसको गाज़ी की पदवी मुस्लिमो के अंदर दे गई थी. ये जन्मजंयती उस महावीर का है जिसने धर्म व राष्ट्र की रक्षा के लिए 16 की उम्र में अत्याचारी टीपू ओर इसके अब्बाजान हैदर अली और निजाम को 4 बार युद्ध मे हराया था.
पानीपत का तीसरा युद्ध मराठा साम्राज्य और अफ़ग़ानिस्तान के बादशाह अहमद शाह दुर्रानी के बीच हुआ था. वह युद्ध इतना भीषण था कि उसमें 1 लाख मराठा सैनिकों के मारे जाने की बात कही जाती है. इस युद्ध में मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिव राव भाउ जी ने किया था. वो छत्रपति शिवाजी महराज और पेशवा जी के बाद तीसरे स्थान पर आते थे. युद्ध में सदाशिव राव जी का साथ श्रीमंत विश्वास राव पेशवा जी ने दिया था. वो पेशवा बालाजी बाजीराव भट्ट जी के बेटे थे. युद्ध में उनकी वीरगति प्राप्त हो गई. इससे आहत सदाशिव जी अपने हाथी को छोड़ कर घोड़े पर सवार हुए और दुर्रानी की सेना पर प्रलय बन कर टूट पड़े. मराठा सेना ने हाथी के ऊपर सदाशिव जी का स्थान खाली देख कर सोचा कि उनके सेनापति मारे गए हैं. सेना में भगदड़ मच गई और दुर्रानी ने इसका फ़ायदा उठाया.सदाशिव जी भी वीरगति को प्राप्त हुए.
ये कहानी यहीं से शुरू होती है. जनवरी 1761 में हुए इस युद्ध के बाद उसी साल जून में एक 16 वर्ष के लड़के ने राजाराम भोंसले जी के छत्र तले मराठा साम्राज्य की कमान संभाली. वो विश्वास राव जी के भाई थे. उन्होंने पानीपत के युद्ध की हार को क़रीब से देखा था. उन्हें पता था कि ये लड़ाई अहमद शाह दुर्रानी से नहीं, बल्कि अवध के नवाब शुजाउद्दौला और अफ़ग़ान रोहिल्ला के साथ भी थी. इन सभी ने गठबंधन बना कर मराठा साम्राज्य को चुनौती दी थी. उस 16 वर्ष के लड़के का नाम थाश्रीमंत माधवराव पेशवा जी. माधवराव मराठा जी साम्रज्य के 8वें पेशवा थे. पानीपत के तीसरे युद्ध ने न सिर्फ़ उनके भाई विश्वासराव जी, बल्कि उनके चाचा सदाशिव राव जी की भी वीरगति को प्राप्त हो गई थी. यह बहुत ही कठिन समय था.
उनके पेशवा बनने के एक महीने पहले ही उनके पिता नाना साहब जी की मृत्यु हो गई थी. हैदराबाद का निज़ाम मराठा साम्राज्य पर बुरी नज़र रखे हुए था. सदाशिव जी के नेतृत्व में मराठों ने उसे फ़रवरी 1760 में धूल चटाई थी, पानीपत के तीसरे युद्ध के लगभग 1 वर्ष पहले. वह अपनी खोई ज़मीन वापस पाने को बेचैन था. निज़ाम ने उस युद्ध में अहमदनगर, दौलताबाद, बुरहानपुर और बीजापुर जैसे बड़े क्षेत्र गंवा दिए थे. ऐसी कठिनाइयों के बीच मराठा को पुनर्जीवित करने का श्रेय माधवराव जी को दिया जाता है.
माधवराव जी ने मुगल बादशाह शाह आलम II को फिर से दिल्ली में स्थापित किया. इससे पहले आलम इलाहबाद में निर्वासन की ज़िंदगी जी रहे थे. लेकिन माधवराव की पहली बड़ी परीक्षा हुई दिसंबर 1761 में, जब निज़ाम ने मौके की ताक में पुणे की ओर कूच किया. रघुनाथराव के नेतृत्व में मराठों ने फिर से निज़ाम को धूल चटाई. हालाकि, इस युद्ध में सेना का नेतृत्व करने वाले माधवराव जी के चाचा रघुनाथराव जी भी पेशवा बनना चाहते थे और एक तरह से पुणे में आंतरिक कलह चल रहा था. लेकिन, निज़ाम इसका फ़ायदा नहीं उठा पाया.
वहीं, अगस्त 1763 में निज़ाम और मराठा एक बार फिर आमने-सामने थे. रघुनाथराव जी भी मराठा सेना का नेतृत्व कर रहे थे. निज़ाम ने पुणे की ओर बढ़ते समय मंदिरों को तोड़ा था. मां पार्वती की प्रतिमा को खंडित कर दिया था. क्रोधित रघुनाथराव जी ने बदला लेने की ठान रखी थी. निज़ाम का वजीर विट्ठल सुन्दर भाग्यनगर (हैदराबाद) की सेना का नेतृत्व कर रहा था. युद्ध के बीच में अचानक से रघुनाथराव जी दुश्मनों से घिर गए थे. तब माधवराव जी की रणनीतिक के कारण उनकी जान बची और भाग्यनगर (हैदराबाद) का वज़ीर मारा गया था.
आज की उस सर्वोच्च गाथा धर्मरक्षक वीर योद्धा श्रीमंत माधवराव पेशवा जी के जन्मजंयती पर सुदर्शन परिवार बारंबार नमन करता है उस महायोद्धा को और उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है.
सहयोग करें
हम देशहित के मुद्दों को आप लोगों के सामने मजबूती से रखते हैं। जिसके कारण विरोधी और देश द्रोही ताकत हमें और हमारे संस्थान को आर्थिक हानी पहुँचाने में लगे रहते हैं। देश विरोधी ताकतों से लड़ने के लिए हमारे हाथ को मजबूत करें। ज्यादा से ज्यादा आर्थिक सहयोग करें।
ताज़ा खबरों की अपडेट अपने मोबाइल पर पाने के लिए डाउनलोड करे सुदर्शन न्यूज़ का मोबाइल एप्प