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वाराणसी कैंट और 39 GTC का पर्यावरणीय कायाकल्प... स्वच्छ भारत और फिट इंडिया मिशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली अभिनव पहलें

39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर बना नवाचार और सतत विकास का प्रतीक, ई-वाहनों से लेकर सौर ऊर्जा तक, हर मोर्चे पर क्रांतिकारी बदलाव।

Ravi Rohan
  • Apr 5 2025 4:30PM

एक वर्ष के समर्पित प्रयास और अद्वितीय समन्वय के बाद, 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर (39 GTC) और वाराणसी मिलिट्री स्टेशन ने सतत विकास, नवाचार और सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित कर दिए हैं। आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के नेतृत्व में, वाराणसी कैंटोनमेंट क्षेत्र में कई पर्यावरण अनुकूल पहलों ने स्वच्छ, हरित और सजीव वातावरण का निर्माण किया है। यह परिवर्तन न केवल ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ की भावना के अनुरूप है, बल्कि देशभर के कैंटोनमेंट क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मिसाल बन गया है।

प्लास्टिक मुक्त कैंटोनमेंट: 'थैला घर' और 'बॉक्स ऑफ काइंडनेस' से नई पहल

पिछले वर्ष की शुरुआत में, AWWA ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक और पॉलीथीन पर प्रतिबंध लगाते हुए एक साहसिक कदम उठाया। स्टेशन के गेट और दुकानों पर 'थैला घर' की शुरुआत की गई, जहां दान में मिली पुरानी कपड़ों से बने थैले उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही, 'बॉक्स ऑफ काइंडनेस' में कपड़े और खिलौनों का संग्रह किया जाता है, जिन्हें जरूरतमंदों तक पहुँचाया जाता है। जो कपड़े उपयोग लायक नहीं होते, उन्हें भी थैले बनाने में पुन: प्रयोग किया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन में नवाचार: घर-घर पहुंचा स्वच्छता संदेश

घर-घर कचरा पृथक्करण को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए। गीला, सूखा और बायोहैज़र्ड कचरे के लिए अलग-अलग नीले, हरे और लाल डस्टबिन दिए गए हैं। बैटरी चालित कलेक्शन वाहन तड़के से अपने अभियान की शुरुआत करते हैं, और स्वच्छ भारत के संदेश प्रसारित करते हुए सड़क किनारे के कूड़ेदानों पर निर्भरता कम कर रहे हैं।

'वेस्ट क्रेडिट पॉइंट्स' से जिम्मेदार नागरिक बन रहे लोग

नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठी योजना के तहत 'प्लास्टिक कचरा बैंक' स्थापित किया गया है, जहां प्लास्टिक जमा कर क्रेडिट पॉइंट्स प्राप्त किए जा सकते हैं। SHYNA ECO UNIFIED के साथ समझौते के तहत, अपशिष्ट प्लास्टिक के लिए ₹5 प्रति किलो का भुगतान तुरंत UPI के माध्यम से किया जाता है, जिससे डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिल रहा है।

शून्य अपशिष्ट और संरक्षण परियोजनाएं बनीं उदाहरण

कचरे से बनी PET इंटरलॉकिंग टाइल्स से पथ बनाए गए हैं, वहीं प्लास्टिक बोतलों में पॉलीथीन भरकर बनाए गए इको-ब्रिक्स का उपयोग बेंच, मूर्तियों और बैठने की जगहों के निर्माण में किया गया है। बायो-शौचालयों में जैव पाचनक (बायोडाइजेस्टर) तकनीक से कचरे को पानी में बदल दिया जाता है।

ग्रीन ऑडिटोरियम: नवाचार का प्रतीक

पुरानी बैरकों का कायाकल्प कर आधुनिक, सौर ऊर्जा संचालित ग्रीन ऑडिटोरियम का निर्माण किया गया है। यहाँ 55 KW सौर ऊर्जा संयंत्र से बिजली उत्पन्न की जा रही है, जिससे फिल्म प्रदर्शन, व्याख्यान और सामुदायिक समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

सौर ऊर्जा और बैटरी चालित बेड़े का उपयोग

छावनी क्षेत्र में सौर पैनलों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। शून्य उत्सर्जन वाहनों में कचरा संग्रहण वाहन, मिनी फायर टेंडर, गार्डन स्क्वाड वैन, ई-बेकरी वैन, ई-कार्ट, ई-एंबुलेंस, ई-स्कूटर और ई-साइकिल शामिल हैं, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला बोझ कम हो रहा है।

आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सुविधाएँ

38 शौचालय परिसरों का नवीनीकरण हवादार, जल-संरक्षण और स्वच्छता पर केंद्रित है। अपशिष्ट खाद्य पैकेजिंग से बनी 'प्लास्ट प्लाई' शीट्स का उपयोग प्रहरी पोस्ट और लॉन्ड्री की छतों में किया गया है। सामूहिक आरओ प्लांट और 'ग्रीन लॉन्ड्री' जैसे नवाचार भी अपनाए गए हैं।

समग्र जल और अपशिष्ट समाधान

नई जल निस्पंदन प्रणालियों के साथ-साथ जीवाणु नियंत्रण के लिए गंबूसिया मछलियों का उपयोग किया गया है। रेलवे एसटीपी से प्रवाहित जल का उपयोग टरबाइनों के माध्यम से जल विद्युत उत्पादन में किया जा रहा है। जैव मीथनीकरण तकनीक के माध्यम से रसोई कचरे को एलपीजी में बदला जा रहा है।

सुरक्षा और सामुदायिक विकास

बेरिकेटिंग, चैन-लिंक फेंसिंग और सुव्यवस्थित पार्किंग शेड के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाई गई है। सामुदायिक किचन गार्डन और दान के लिए 'बॉक्स ऑफ काइंडनेस' जैसी पहलों से सामुदायिक भावना को मजबूती मिल रही है। सैनिक सुविधा परिसर का भी कायाकल्प कर दिया गया है।

अभ्यास के लिए आधुनिक प्रशिक्षण संरचनाएं

'बेली ब्रिज' के माध्यम से प्रशिक्षण क्षेत्रों को जोड़ा गया है। ड्रोन निर्माण, 3D प्रिंटिंग, डिजिटल स्टूडियो, LED स्क्रीन और युद्ध प्रशिक्षण केंद्रों ने 39 GTC को नवाचार का केंद्र बना दिया है। Walk-through Sand Models और आईटी प्रशिक्षण ने भी सैनिकों के कौशल में वृद्धि की है।

भविष्य की स्थिरता का मॉडल

39 GTC, AWWA और RWA ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और समाज कल्याण का जो मॉडल तैयार किया है, वह पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत है। वाराणसी स्टेशन अब सामूहिक इच्छाशक्ति और नवाचार का प्रतीक बन गया है, और सतत विकास की दिशा में एक मिसाल पेश कर रहा है।

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