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बागेश्वर बाबा के हिंदू गांव की घोषणा से मची हलचल... अब बदले की आग में हो रही मुस्लिम गांव बसने की भी प्लानिंग

मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) ने भारत के पहले हिंदू ग्राम की स्थापना की बात कही है और इसकी आधारशिला भी रख दी है।

Deepika Gupta
  • Apr 5 2025 5:23PM

मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) ने भारत के पहले हिंदू ग्राम की स्थापना की बात कही है और इसकी आधारशिला भी रख दी है। बाबा बागेश्वर का कहना है कि यह हिंदू ग्राम दो वर्षों में तैयार हो जाएगा और इसमें एक हजार परिवारों को बसाया जाएगा। उनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र का सपना हिंदू घर से ही शुरू होगा और इस ग्राम के निर्माण से हिंदू समाज की नींव मजबूत होगी।

बागेश्वर धाम में बनने वाले इस ग्राम को लेकर राजनीतिक विवाद भी उठने लगा है। कांग्रेस के प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और मांग की है कि क्या अन्य धर्मों के अनुयायी भी इसी तरह अपने-अपने ग्राम बना सकते हैं। उनका कहना है, "अगर मुख्यमंत्री मुझे अनुमति दें, तो मैं एक मुस्लिम ग्राम, एक क्रिश्चियन ग्राम, और अन्य धर्मों के लिए भी अलग-अलग ग्राम बना सकता हूं, ताकि भारत की विविधता और उसकी एकता को खत्म किया जा सके।"

 अब्बास हाफिज ने कहा- "गांधी और नेहरू की कल्पना थी कि भारत में हर एक आदमी साथ रहे। कांग्रेस का काम है सारे धर्म एक साथ रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पहुंचे, बाबा बागेश्वर की तारीफें की। बाबा बागेश्वर के वहां उन्होंने पर्ची भी बनाई है। क्या वह सहमत हैं? क्या मोदी जी कह कर आए थे कि हिंदू राष्ट्र की बात करनी है? आप लोकसभा में प्रस्ताव पारित कर दीजिए कि वह बात सही है जो बाबा बागेश्वर कह रहे हैं। ऐसी मांगे अब सामने आएंगी, कल को जैन समाज भी मांग करेगा, दूसरे समाज भी मांग करेंगे कि हमारे लिए भी एक शहर बना दीजिए।"

बाबा बागेश्वर का कहना है कि इस हिंदू ग्राम का उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना है और इसे अन्य धर्मों से अलग करना है। उनके अनुसार, हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना तब तक पूरी नहीं हो सकती जब तक हिंदू परिवार, हिंदू समाज और हिंदू ग्राम की स्थापना नहीं हो।

इस पूरे मामले पर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिक्रिया तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इस कदम को धार्मिक स्वतंत्रता और समाज के कल्याण के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरों का कहना है कि यह कदम समाज में विभाजन और असहमति को बढ़ावा दे सकता है। अब देखना होगा कि इस विवाद के बीच, क्या यह योजना आगे बढ़ेगी या इसे राजनीतिक और सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ेगा।

 

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