मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए रक्षा मंत्रालय से एक महत्वपूर्ण सवाल किया। अदालत ने पूछा कि जब जबलपुर की रिड्ज़ रोड स्थित मस्जिद नूर में आम मुस्लिम नागरिकों को नमाज़ पढ़ने से रोका जा रहा है, तो ऐसा क्यों हो रहा है? जबकि मंदिरों और चर्चों में आम जनता को पूजा-पाठ की अनुमति है। इस मामले में चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा, “उत्तरदाता यह स्पष्ट करें कि क्या आम नागरिकों को मंदिर और चर्च में पूजा करने की अनुमति है, और यदि हाँ, तो फिर मुस्लिम समुदाय के नागरिकों को मस्जिद नूर में नमाज़ पढ़ने से क्यों रोका जा रहा है, जो कि कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट (CDA) रिड्ज़ रोड, जबलपुर की रक्षा भूमि के पीछे स्थित है?”
यह याचिका मस्जिद नूर प्रबंधन समिति के सचिव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि स्टेशन कमांडर (उत्तरदाता नंबर 4) ने याचिकाकर्ता और अन्य मुस्लिम नागरिकों को मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोक दिया है। मस्जिद नूर, जो 1918 से आम नागरिकों और सेना के जवानों द्वारा इबादत के लिए इस्तेमाल की जा रही है, वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 3 के तहत वक्फ बाय यूज़ के रूप में मान्य है। इसका मतलब है कि यह मस्जिद सार्वजनिक उपयोग के लिए है और यहां नमाज़ पढ़ने का अधिकार किसी भी नागरिक को है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि अब तक कभी भी किसी अधिकारी द्वारा नमाज़ पढ़ने पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। लेकिन हाल ही में, स्टेशन कमांडर ने मौखिक रूप से नमाज़ पर रोक लगाई, जिसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता और अन्य मुस्लिम नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों से जुड़ा हुआ है, जिसे संविधान में सुनिश्चित किया गया है।
यह मुद्दा तब और भी गंभीर हो जाता है जब अदालत ने यह सवाल उठाया कि अगर आम नागरिकों को मंदिर और चर्च में पूजा की अनुमति है, तो फिर मुस्लिम नागरिकों को मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से क्यों रोका जा रहा है? यह सवाल धार्मिक भेदभाव को लेकर उठाए गए कई सवालों का हिस्सा बन गया है, जिनका समाधान जरूरी है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से इस मामले में स्पष्टता मांगी है और उम्मीद जताई है कि इस मुद्दे का शीघ्र हल निकाला जाएगा ताकि नागरिकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन न हो। इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत द्वारा उठाए गए सवालों का उत्तर आने की संभावना है, जो इस मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।