विनायक चतुर्थी, जिसे माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष, विनायक चतुर्थी 2 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी। तो जानिए सही तिथि से लेकर पूजा विधि तक की जानकारी।
कब है विनायक चतुर्थी
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 2 मार्च को रात 9 बजकर 1 मिनट पर हो रही है। वहीं इस चतुर्थी तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 6 बजकर 2 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 3 मार्च को विनायक चतुर्थी का व्रत रख जाएगा। इस दिन चन्द्रास्त रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा।
विनायक चतुर्थी पूजा विधि
स्नान और व्रत का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान गणेश की पूजा का संकल्प लें।
स्थापना: घर के किसी स्वच्छ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
सजावट: गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें चंदन, रोली, सिंदूर आदि से सजाएं।
पुष्प और दूर्वा अर्पित करें: गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें, क्योंकि दूर्वा उन्हें अत्यंत प्रिय है।
भोग अर्पित करें: गणेश जी को मोदक, लड्डू या तिल के लड्डू का भोग अर्पित करें।
मंत्र जाप: "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें।
आरती: पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रसाद ग्रहण करें।
व्रत पारण
व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन करें और तामसिक भोजन से परहेज करें। व्रत खोलने से पहले गणेश जी की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
विनायक चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और विघ्नों का नाश होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो अपने कार्यों में सफलता और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।